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फ्लू के टीके की उच्च खुराक अल्ज़ाइमर रोग के कम जोखिम से जुड़ी है

लेखकसंपादकीय टीम आज, 14:23 0
फ्लू के टीके की उच्च खुराक अल्ज़ाइमर रोग के कम जोखिम से जुड़ी है
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संक्षेप में
  • 65 वर्ष या उससे अधिक आयु के लोगों में फ्लू के टीके की उच्च खुराक को अल्ज़ाइमर रोग के जोखिम में लगभग 55 प्रतिशत कमी से जोड़ा गया
  • मानक खुराक के लिए शोधकर्ताओं ने जोखिम में 40% की कमी की सूचना दी
  • नतीजे एक संबंध दिखाते हैं, लेकिन यह साबित नहीं करते कि टीकाकरण बीमारी को रोकता है

अध्ययन में क्या सामने आया

UTHealth Houston के शोधकर्ताओं ने अध्ययन किया कि क्या वार्षिक फ्लू वैक्सीन की खुराक 65 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में अल्ज़ाइमर रोग विकसित होने की संभावना से जुड़ी है। विश्लेषण में लगभग 200,000 पुरुषों और महिलाओं के आंकड़े शामिल किए गए। अधिक मात्रा में एंटीजन वाली वैक्सीन लगवाने वालों में बीमारी का जोखिम मानक खुराक लगवाने वालों की तुलना में कम पाया गया। यह अध्ययन चिकित्सा पत्रिका Neurology में प्रकाशित हुआ है और टीकाकरण तथा मस्तिष्क के स्वास्थ्य के बीच संभावित संबंध पर टीम के शोध को आगे बढ़ाता है।

इस सवाल का महत्व बुज़ुर्ग अमेरिकियों में बीमारी के व्यापक प्रसार से जुड़ा है। प्रकाशन में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, 2025 में अमेरिका में 65 वर्ष या उससे अधिक उम्र के 7 मिलियन से अधिक लोग अल्ज़ाइमर रोग के साथ जी रहे थे—इस आयु वर्ग के लगभग हर नौ में से एक व्यक्ति। दिए गए अनुमान के अनुसार, 2050 तक यह संख्या दोगुने से भी अधिक हो जाएगी। अल्ज़ाइमर डिमेंशिया का प्रमुख कारण है, इसलिए सामान्य टीकों और बीमारी के जोखिम के बीच संभावित संबंध शोधकर्ताओं का ध्यान आकर्षित करते हैं।

यह नया अध्ययन 2022 के उस शोध को आगे बढ़ाता है, जिसमें न्यूरोलॉजिस्ट पॉल शुल्त्स के नेतृत्व वाले समूह ने 65 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोगों में फ्लू के टीके लगवाने और अल्ज़ाइमर रोग के कम जोखिम के बीच संबंध पाया था। बाद में, स्थानीय जनस्वास्थ्य विशेषज्ञों ने शुल्त्स को पहले के नतीजों पर चर्चा करने के लिए आमंत्रित किया और पूछा कि क्या टीके की अलग-अलग खुराकों से फर्क पड़ सकता है। इसी से एक अधिक विशिष्ट सवाल उठा: क्या अधिक प्रभावी टीका जोखिम में अतिरिक्त कमी से जुड़ा है? नए अध्ययन में इसी संबंध की जाँच की गई।

टीके की खुराकों की तुलना क्यों की गई

उम्र बढ़ने के साथ प्रतिरक्षा प्रणाली की संक्रमणों को पहचानने और उनसे लड़ने की क्षमता धीरे-धीरे कम हो जाती है। इसलिए फ्लू बुज़ुर्गों के लिए विशेष रूप से ख़तरनाक हो सकता है। CDC 65 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोगों के लिए उच्च-खुराक वाले टीके को प्राथमिक विकल्प के रूप में सुझाता है, जिसे अधिक मज़बूत प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया के लिए तैयार किया गया है। यह उम्र से जुड़ी कमज़ोरी को ध्यान में रखकर दी गई सिफ़ारिश है; इसका मतलब यह नहीं कि टीका फ्लू या अल्ज़ाइमर रोग से बचाव की गारंटी देता है। शोधकर्ताओं ने अलग से जाँचा कि क्या टीके की खुराक का इस बीमारी से कोई संबंध है।

हाई-डोज़ वैक्सीन में मानक वैक्सीन की तुलना में फ़्लू एंटीजन चार गुना अधिक होता है। एंटीजन वैक्सीन के ऐसे घटक होते हैं जो प्रतिरक्षा प्रणाली को वायरस पहचानने और उससे बचाव की तैयारी करने में मदद करते हैं। 2022 तक CDC ने 65 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए किसी एक प्रकार की इंजेक्शन वाली वैक्सीन को प्राथमिकता नहीं दी थी: मुख्य संदेश यही था कि फ़ॉर्मूला चाहे जो हो, हर साल टीका लगवाएँ। इस अध्ययन में ये अंतर इसलिए अहम हैं, क्योंकि तुलना टीका लगवाने वालों और न लगवाने वालों के बीच नहीं, बल्कि वैक्सीन की दो अलग-अलग खुराकों के बीच है।

खुराकों की तुलना करने का व्यावहारिक कारण वैक्सीनों की उपलब्धता भी थी: कभी-कभी हाई-डोज़ वैक्सीन की माँग उपलब्ध भंडार से अधिक हो जाती है, इसलिए कुछ बुज़ुर्गों को मानक विकल्प दिया जाता है। इससे शोधकर्ता अलग-अलग फ़ॉर्मूले की वैक्सीन लगवाने वाले लोगों के नतीजों की तुलना कर सके। टीम हज़ारों बुज़ुर्गों के बारे में आँकड़े जुटाने में सफल रही और फिर 65 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लगभग 2 लाख प्रतिभागियों के आँकड़ों का विश्लेषण किया। उम्र अपने आप में अल्ज़ाइमर के बढ़े हुए जोखिम से जुड़ी है, इसलिए यह समूह ऐसी तुलना के लिए विशेष रूप से उपयुक्त है।

दिए गए परिणामों को कैसे समझें

विश्लेषण में 65 वर्ष या उससे अधिक आयु के ऐसे पुरुषों और महिलाओं को शामिल किया गया, जिन्हें फ्लू के टीके की उच्च या मानक खुराक मिली थी। अध्ययन का मुख्य परिणाम समूहों के बीच अल्ज़ाइमर रोग के सांख्यिकीय रूप से देखे गए जोखिम में अंतर था: उच्च खुराक पाने वाले लोगों में यह जोखिम कम था। प्रकाशित विवरण में निगरानी की अवधि या समूहों के गठन के तरीके के बारे में अतिरिक्त जानकारी नहीं दी गई है। इसलिए इन परिणामों को उपलब्ध आंकड़ों के दायरे में ही प्रस्तुत करना चाहिए और अध्ययन की ऐसी विशेषताएँ नहीं जोड़नी चाहिए जिनका उल्लेख नहीं किया गया है।

लेखकों ने बताया कि मानक टीकाकरण अल्ज़ाइमर रोग के जोखिम में 40% की कमी से जुड़ा था, जबकि उच्च खुराक के साथ यह कमी लगभग 55% थी। ये आँकड़े शोधकर्ताओं द्वारा बताई गई जोखिम में कमी को दर्शाते हैं और इन्हें हर व्यक्ति के लिए समान प्रभाव की गारंटी नहीं मानना चाहिए। इसके अलावा, इस तुलना का अर्थ यह नहीं है कि उच्च खुराक मानक खुराक की तुलना में जोखिम को ठीक 15 प्रतिशत अंक कम करती है: स्रोत में दोनों समूहों के लिए अनुमान दिए गए हैं, लेकिन ऐसी सीधी गणना नहीं।

कम जोखिम का संबंध महिलाओं में विशेष रूप से स्पष्ट था: अध्ययन के नतीजों के अनुसार, अधिक खुराक से उन्हें जोखिम में अधिक कमी मिली प्रतीत होती है। यह अवलोकन विश्लेषण के निष्कर्षों से जुड़ा है और यह नहीं बताता कि यह अंतर ठीक इसी तरह क्यों दिखाई दिया। स्रोत महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग संख्यात्मक अनुमान नहीं देता, इसलिए इस अंतर का परिमाण स्पष्ट नहीं किया जा सकता। व्यावहारिक रूप से, यह नतीजा आगे के अध्ययन की दिशा सुझाता है, न कि किसी खास महिला या पुरुष के लिए व्यक्तिगत पूर्वानुमान।

अभी क्या-क्या अज्ञात है

निष्कर्ष की एक प्रमुख सीमा यह है कि अध्ययन में एक संबंध सामने आया, कारण-परिणाम का प्रमाण नहीं। यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि वैक्सीन की अधिक खुराक ही अल्ज़ाइमर रोग को रोकती है: देखा गया अंतर आगे जाँच का आधार हो सकता है, लेकिन अपने आप में यह किसी क्रियाविधि की पुष्टि नहीं करता। लेखकों का कहना है कि नतीजे फ्लू के टीकाकरण और मस्तिष्क के स्वास्थ्य के बीच संभावित संबंध के बारे में उपलब्ध साक्ष्यों में योगदान देते हैं। यह सवाल खुला है कि क्या प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया रोग से जुड़ी प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकती है।

नया अध्ययन भी फ़्लू की रोकथाम और डिमेंशिया से बचाव के बीच के अंतर को नहीं मिटाता। आम तौर पर हर साल टीकाकरण की सलाह दी जाती है, और फ़्लू तथा उसकी जटिलताएँ उन लोगों के लिए विशेष रूप से ख़तरनाक हैं जो पहले से ही संज्ञानात्मक विकारों के साथ जीवन बिता रहे हैं। 65 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए CDC उच्च-खुराक वाले टीके को प्राथमिकता देता है, लेकिन अल्ज़ाइमर रोग पर किया गया यह अध्ययन इस बीमारी की रोकथाम के प्रमाण के आधार पर कोई अलग चिकित्सकीय सिफ़ारिश नहीं करता। स्रोत में आगे और शोध की आवश्यकता पर ज़ोर दिया गया है।

इस परिणाम के महत्व का आकलन करने के लिए और शोध की ज़रूरत है: उपलब्ध आँकड़े इस सवाल का जवाब नहीं देते कि क्या टीके की खुराक सीधे अल्ज़ाइमर रोग के विकास को प्रभावित करती है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि कौन-सी जैविक प्रक्रियाएँ देखे गए संबंध की व्याख्या कर सकती हैं। फिलहाल विश्वसनीय रूप से केवल इतना कहा जा सकता है कि यह विश्लेषण 65 वर्ष से अधिक उम्र के लगभग 2 लाख लोगों पर किया गया था और अधिक खुराक के साथ संबंध अधिक स्पष्ट था। इन निष्कर्षों के आधार पर अल्ज़ाइमर से सुरक्षा का आश्वासन देना या टीके के प्रकार के आधार पर किसी व्यक्ति के लिए पूर्वानुमान लगाना संभव नहीं है।

स्रोत: ScienceDaily

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