उच्च बॉडी मास इंडेक्स का संबंध संज्ञानात्मक क्षमताओं में तेज़ गिरावट से है

- 50 वर्ष से अधिक उम्र के 8,200 से ज़्यादा वयस्कों पर किए गए अध्ययन में, 24 वर्षों की अवधि में उच्च बीएमआई का संबंध याददाश्त और संज्ञानात्मक कार्यों में तेज़ गिरावट से पाया गया।
- सबसे स्पष्ट संबंध अध्ययन के आठवें वर्ष और 65 वर्ष से अधिक आयु के प्रतिभागियों में देखा गया।
- यह अध्ययन यह साबित नहीं करता कि अधिक वजन सीधे तौर पर संज्ञानात्मक क्षमता में गिरावट का कारण बनता है; लेखकों के अनुसार, वजन पर नियंत्रण एक संभावित रूप से परिवर्तनीय कारक है।
दीर्घकालिक अनुवर्ती अध्ययन में क्या सामने आया
अधिक वजन का संबंध केवल शरीर की स्थिति से ही नहीं, बल्कि उम्र बढ़ने के साथ स्मृति और सोच में होने वाले बदलावों से भी हो सकता है। जॉर्जिया विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं की एक टीम ने 50 वर्ष से अधिक आयु के वयस्कों के आँकड़ों का अध्ययन करके यह निष्कर्ष निकाला। जिन प्रतिभागियों का बॉडी मास इंडेक्स अधिक था, उनकी संज्ञानात्मक क्षमताओं में औसतन अधिक तेज़ी से गिरावट आई। यह अवलोकन संबंधी आँकड़ों में पाया गया संबंध है, न कि इस बात का प्रमाण कि वजन सीधे तौर पर गिरावट का कारण बनता है।
उम्र बढ़ने के साथ कई लोगों को जानकारी जल्दी याद करने, स्पष्ट रूप से सोचने और नई जानकारी को समझने में कठिनाई होने लगती है। इस लेख में बताया गया है कि स्वस्थ वयस्कों में ऐसे बदलाव आम तौर पर मामूली होते हैं और धीरे-धीरे विकसित होते हैं। नए नतीजे एक ऐसे संभावित कारक की ओर संकेत करते हैं, जिसका संबंध इन बदलावों की तेज़ गति से है: बढ़ा हुआ बॉडी मास इंडेक्स। इस अध्ययन में केवल स्मृति के किसी एक कार्य पर ही नहीं, बल्कि संज्ञानात्मक स्वास्थ्य के कई क्षेत्रों पर विचार किया गया।
इस विश्लेषण में 50 वर्ष से अधिक आयु के 8,200 से ज्यादा वयस्कों की जानकारी शामिल थी, जिनका 24 वर्षों तक अनुसरण किया गया। ये आँकड़े राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधिक एक अध्ययन के तहत एकत्र किए गए थे। इतने लंबे समय तक किए गए इस अध्ययन से समय के साथ शरीर के वजन के मापदंडों और संज्ञानात्मक क्षमताओं में बदलाव की तुलना करना संभव हुआ। हालांकि, लंबे समय तक किया गया अध्ययन भी अपने आप इस सवाल का जवाब नहीं देता कि बढ़ा हुआ बीएमआई कार्यक्षमता में गिरावट का कारण बनता है या दोनों विशेषताएँ अन्य परिस्थितियों से जुड़ी हैं।
बीएमआई से संबंध किस तरह दिखा
अधिक बीएमआई का संबंध याददाश्त, समग्र संज्ञानात्मक मापदंडों और कार्यकारी कार्यों में अधिक तेज़ गिरावट से था। रोज़मर्रा के कामों के लिए ये कार्य महत्वपूर्ण हैं: एकाग्रता, योजना बनाना, काम व्यवस्थित करना और भावनाओं को नियंत्रित करना। इस प्रकार, पाया गया संबंध उन क्षमताओं से जुड़ा है जो रोज़मर्रा की विभिन्न गतिविधियों को करने में मदद करती हैं। हालांकि, अध्ययन यह दावा नहीं करता कि अधिक बीएमआई वाले हर व्यक्ति को याददाश्त या सोचने-समझने में स्पष्ट कठिनाई ज़रूर होगी।
लेखक शरीर के वजन और संज्ञानात्मक स्वास्थ्य के बीच एक सुसंगत संबंध बताते हैं: बीएमआई के प्रत्येक अतिरिक्त अंक के साथ मापों में गिरावट की गति तेज़ थी। इसका अर्थ यह नहीं है कि अध्ययन में कोई ऐसा सार्वभौमिक सीमा-बिंदु निर्धारित किया गया, जिसके बाद सभी में गिरावट शुरू हो जाती है। यह परिणाम अध्ययन किए गए समूह में देखी गई एक प्रवृत्ति का वर्णन करता है और बताता है कि निगरानी अवधि के दौरान बीएमआई के अपेक्षाकृत छोटे अंतर भी मायने रख सकते हैं।
यह संबंध अध्ययन के आठवें वर्ष में सबसे मज़बूत था, और सबसे स्पष्ट प्रभाव 65 वर्ष से अधिक आयु के प्रतिभागियों में देखे गए। ये महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण हैं: परिणाम यह नहीं बताते कि जोखिम में हर चरण पर और सभी आयु-वर्गों में समान बदलाव होता है। स्रोत में प्रभाव के परिमाण के विस्तृत संख्यात्मक अनुमान या इस बात की व्याख्या नहीं दी गई है कि आठवाँ वर्ष ही क्यों अलग रहा। इसलिए इस विशेषता को देखे गए परिणाम के रूप में मानना चाहिए, न कि किसी स्थापित तंत्र के रूप में।
समस्या के संभावित तंत्र और उसका पैमाना
लेखक इस संभावना की ओर संकेत करते हैं कि वजन का प्रबंधन संज्ञानात्मक गिरावट को धीमा कर सकता है; अध्ययन के अनुसार, संभावित लाभ दो वर्षों के भीतर ही दिखाई दे सकता है। प्रमुख लेखक सुहांग सॉन्ग ने बीएमआई को स्वस्थ उम्र बढ़ने से जुड़े उन जोखिम कारकों में से एक बताया जिन्हें बदलना सबसे आसान है। यह शोधकर्ता का मत है, हर व्यक्ति के लिए किसी निश्चित परिणाम का वादा नहीं: लेख में यह नहीं बताया गया है कि सभी प्रतिभागियों को वजन घटाने का एक जैसा कार्यक्रम दिया गया था।
अध्ययन में मोटापे को 30 या उससे अधिक बीएमआई के रूप में परिभाषित किया गया है। हालांकि, कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि मोटापे का समग्र आकलन करने के लिए केवल यह सूचकांक पर्याप्त नहीं है: वे कमर की परिधि और अधिक वजन से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं को भी ध्यान में रखने का सुझाव देते हैं। निष्कर्षों की व्याख्या के लिए यह अंतर महत्वपूर्ण है: अध्ययन में देखे गए संबंध का आधार बीएमआई है, जो स्वास्थ्य के सभी पहलुओं का वर्णन नहीं करता और मोटापे के वर्गीकरण के संभावित तरीकों को भी पूरी तरह शामिल नहीं करता।
इस संबंध के संभावित स्पष्टीकरण के तौर पर शोधकर्ता कई जैविक प्रक्रियाओं पर विचार कर रहे हैं। अधिक वजन से सूजन बढ़ सकती है, रक्त संचार बाधित हो सकता है और इसका संबंध इंसुलिन प्रतिरोध से हो सकता है। लेखकों के अनुसार, इन बदलावों का संयुक्त प्रभाव संज्ञानात्मक समस्याओं, अल्ज़ाइमर रोग और डिमेंशिया के अन्य रूपों की संभावना बढ़ा सकता है। यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि प्रस्तुत सामग्री में इन प्रक्रियाओं को संभावित तंत्र बताया गया है, न कि ऐसे कारण जिन्हें इस विश्लेषण में सीधे परखा गया हो।
नतीजे क्या बताते हैं—और क्या साबित नहीं करते
इन नतीजों को समझने के लिए अमेरिका में मोटापे के प्रसार का संदर्भ उपयोगी है। रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्रों के आंकड़ों के अनुसार, यदि मोटापे का आकलन केवल बीएमआई के आधार पर किया जाए, तो लगभग हर पाँच में से दो अमेरिकी मोटापे के मानदंडों पर खरे उतरते हैं। कमर के घेरे और स्वास्थ्य संबंधी स्थितियों को शामिल करने वाले अधिक व्यापक दृष्टिकोण के तहत, मोटापे से ग्रस्त माने जाने वाले लोगों का अनुपात बढ़कर 75% हो जाता है। ये अनुमान अलग-अलग परिभाषाओं पर आधारित हैं और इन्हें आपस में मिलाकर नहीं देखना चाहिए।
शोधकर्ता डिमेंशिया की समस्या के व्यापक पैमाने की ओर भी ध्यान दिलाते हैं: अभी सात मिलियन से अधिक अमेरिकी इसके साथ जी रहे हैं, और 2050 तक यह संख्या दोगुनी होने की उम्मीद है। इस संदर्भ में, संज्ञानात्मक स्वास्थ्य से जुड़े उन कारकों की खोज, जिन्हें बदला जा सकता है, विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो जाती है। हालांकि, डिमेंशिया की व्यापकता से जुड़े आँकड़े यह साबित नहीं करते कि वज़न पर नियंत्रण से मामलों की कोई निश्चित संख्या रोकी जा सकेगी। यह अध्ययन आगे ध्यान देने की एक संभावित दिशा सुझाता है, न कि रोकथाम के प्रभाव का अनुमान लगाता है।
निष्कर्षों की मुख्य सीमा यह है कि अध्ययन अधिक वजन और संज्ञानात्मक गिरावट के बीच सीधा कारणात्मक संबंध स्थापित नहीं करता। लेखकों का मानना है कि शरीर का वजन संभावित रूप से एक महत्वपूर्ण और बदला जा सकने वाला कारक है, लेकिन पाए गए संबंध के सटीक कारण अभी स्पष्ट नहीं हैं। सुहांग सॉन्ग इस बात पर ज़ोर देते हैं कि डिमेंशिया का कोई इलाज करने वाला औषधि-उपचार नहीं है, इसलिए बदले जा सकने वाले जोखिम कारकों की पहचान करना महत्वपूर्ण है। यह अध्ययन Journal of Neurology में प्रकाशित हुआ है; इस नतीजे के महत्व को स्पष्ट करने के लिए आगे और आँकड़ों की आवश्यकता है।
स्रोत: ScienceDaily



