EFSA की दैनिक पानी की आवश्यकता: अलग-अलग उम्र में किन बातों का ध्यान रखें

- EFSA पेय और भोजन से मिलने वाले कुल पानी की गणना करता है। प्रकाशित दिशा-निर्देश सामान्य तापमान और सामान्य शारीरिक गतिविधि की स्थिति में स्वस्थ लोगों के लिए हैं।
- छह महीने से कम उम्र के बच्चों को आमतौर पर ज़रूरी तरल माँ का दूध या सही तरीके से तैयार किया गया फ़ॉर्मूला देता है; अलग से पानी देने की आम तौर पर ज़रूरत नहीं होती।
- शरीर में पानी की कमी और ज़रूरत से ज़्यादा पानी पीना, दोनों ही ख़तरनाक हैं: पानी की कमी से रक्तसंचार प्रभावित हो सकता है, जबकि ज़्यादा पानी पीने से रक्त में सोडियम का स्तर गिर सकता है।
तरल पदार्थों की ज़रूरत सिर्फ़ पानी के गिलासों तक सीमित क्यों नहीं है
शरीर को पानी सिर्फ़ प्यास बुझाने के लिए नहीं चाहिए। यह शरीर का तापमान स्थिर रखने, पोषक तत्वों और ऑक्सीजन को पहुँचाने तथा चयापचय के अनावश्यक अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है। तरल पदार्थ पाचन में भाग लेते हैं, जोड़ों के कामकाज को सहारा देते हैं और कोशिकाओं के बीच संतुलन बनाए रखते हैं। इसलिए लंबे समय तक पानी की कमी शरीर के कई सामान्य कार्यों को प्रभावित करती है; इसका असर सिर्फ़ मुँह सूखने के एहसास तक सीमित नहीं रहता। कुल जल-संतुलन अहम है: शरीर में आने वाले तरल पदार्थों से उसकी कमी की भरपाई होनी चाहिए।
तरल पदार्थों की आवश्यकता हर व्यक्ति में अलग-अलग होती है। सामग्री में जिन कारकों का स्पष्ट उल्लेख है, उनमें उम्र, शरीर का आकार, शारीरिक गतिविधि और आसपास का तापमान शामिल हैं। इसका अर्थ है कि किसी एक संख्या को अपने-आप हर व्यक्ति के लिए सटीक व्यक्तिगत मानक नहीं माना जा सकता। व्यक्ति की रहने की परिस्थितियाँ भी उसकी आवश्यकताओं को प्रभावित करती हैं: प्रकाशित दिशानिर्देश सामान्य तापमान और शारीरिक गतिविधि के सामान्य स्तर के लिए हैं, न कि हर परिस्थिति और गतिविधि के लिए।
यूरोपीय खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण (EFSA) ने 2010 में ही पानी के दैनिक सेवन के लिए दिशानिर्देशों से जुड़ा एक वैज्ञानिक मत प्रकाशित किया था। इनका उद्देश्य यह बताना है कि निर्धारित परिस्थितियों में अलग-अलग आयु वर्ग के लोगों को कुल मिलाकर कितने तरल पदार्थ की आवश्यकता हो सकती है। इन आँकड़ों का अर्थ यह नहीं है कि उतनी ही मात्रा में सादा पानी पीना चाहिए। कुल आवश्यकता और बोतल से मिलने वाले पानी की मात्रा के बीच का यह अहम अंतर, सिफ़ारिशों को पीने के लिए एक सार्वभौमिक निर्देश मानने से बचने में मदद करता है।
EFSA का दिशानिर्देश वास्तव में किन चीज़ों को ध्यान में रखता है
EFSA की गणना में शरीर को मिलने वाला सारा पानी शामिल होता है: सिर्फ़ सादा पीने का पानी ही नहीं, बल्कि अन्य पेय और खाद्य पदार्थों से मिलने वाला तरल भी। इसलिए व्यक्ति अपनी रोज़ाना की मात्रा का कुछ हिस्सा भोजन से प्राप्त कर सकता है और उसे पूरी मात्रा किसी एक तरह के पेय से लेने की ज़रूरत नहीं है। इस सामग्री में सभी उम्र के लिए विस्तृत मान नहीं दिए गए हैं, इसलिए उपलब्ध जानकारी के आधार पर स्कूली बच्चों और वयस्कों के लिए मानकों की पूरी तालिका तैयार नहीं की जा सकती। छह महीने से कम उम्र के बच्चों के लिए एक संख्यात्मक दिशानिर्देश अलग से दिया गया है।
छह महीने से कम उम्र के शिशुओं के लिए EFSA प्रतिदिन शरीर के प्रति किलोग्राम वज़न पर 100–190 मिलीलीटर तरल की सलाह देता है। सामग्री में पाँच किलोग्राम वज़न वाले बच्चे का उदाहरण दिया गया है: उसके लिए अनुमानित सीमा प्रतिदिन लगभग 500–950 मिलीलीटर है। यह तरल के कुल सेवन का अनुमान है, अलग से पिलाए जाने वाले अतिरिक्त पानी की मात्रा नहीं। इस उम्र में स्वस्थ शिशु के लिए तरल के मुख्य स्रोत माँ का दूध या सही तरीके से तैयार किया गया फ़ॉर्मूला होते हैं।
छह महीने से कम उम्र के स्वस्थ बच्चे को, जो सामान्य रूप से दूध पीता है, आमतौर पर अलग से पानी देने की ज़रूरत नहीं होती, गर्म मौसम में भी नहीं। दिए गए लेख के अनुसार, माँ का दूध अपनी संरचना को शिशु की ज़रूरतों के अनुसार ढाल लेता है, जबकि फ़ॉर्मूला दूध को निर्देशों में बताई गई पानी की ठीक उतनी ही मात्रा से घोलना ज़रूरी है। बनाने का अनुपात अपनी ओर से नहीं बदलना चाहिए: लेख पैकेट पर दिए निर्देशों का पालन करने पर ज़ोर देता है, उनसे अधिक पानी मिलाने पर नहीं।
छह महीने से कम उम्र के शिशुओं के लिए विशेष तरीका
लगभग छह महीने की उम्र से, जब बच्चे के आहार में ठोस आहार शामिल किया जाता है, तो उसे खाने के साथ थोड़ा पानी देना शुरू किया जा सकता है। फिर भी, दूध या फ़ॉर्मूला तरल पदार्थ का एक अहम स्रोत बना रहता है। इस बदलाव का यह मतलब नहीं है कि ठोस आहार तुरंत बच्चे के नियमित भोजन की जगह ले लेता है या उसे बहुत अधिक पानी देना चाहिए। इस सलाह का व्यावहारिक अर्थ है कि शिशु के आहार में माँ के दूध या फ़ॉर्मूला की भूमिका बनाए रखते हुए, धीरे-धीरे उसे पानी देना शुरू करें।
शरीर को जितना पानी मिलता है, उससे अधिक पानी खोने पर तरल पदार्थों का अपर्याप्त सेवन निर्जलीकरण का कारण बनता है। सामग्री में शुरुआती लक्षणों के रूप में प्यास, मुँह सूखना, सिरदर्द, थकान और चक्कर आने का उल्लेख है। पेशाब की मात्रा भी कम हो सकती है और उसका रंग गहरा हो सकता है। इन लक्षणों को तरल पदार्थों की कमी के संभावित संकेत बताया गया है, लेकिन सामग्री किसी एक लक्षण के आधार पर निदान करने की सलाह नहीं देती। समग्र संदर्भ और स्वास्थ्य में बदलाव पर ध्यान देना अधिक महत्वपूर्ण है।
गंभीर निर्जलीकरण के परिणाम और भी गंभीर हो सकते हैं: रक्त संचार प्रभावित हो सकता है, रक्तचाप कम हो सकता है और गुर्दों को नुकसान पहुँचने का खतरा हो सकता है। शिशुओं और बुज़ुर्गों के शरीर में पानी के संतुलन पर विशेष ध्यान देना ज़रूरी है। छोटा बच्चा अभी यह नहीं बता सकता कि उसे प्यास लगी है, जबकि उम्र बढ़ने के साथ बुज़ुर्गों में प्यास का एहसास कमज़ोर हो सकता है। इसलिए, पानी माँगने के स्पष्ट संकेत न मिलने से यह हमेशा पता नहीं चलता कि इन समूहों को कितने पानी की ज़रूरत है।
तरल पदार्थ की कमी और अधिकता के लक्षण
अत्यधिक पानी पीने पर भी जोखिम होता है: यदि कम समय में बहुत अधिक तरल पदार्थ पी लिया जाए, तो गुर्दे उसकी अतिरिक्त मात्रा को बाहर नहीं निकाल पाते। इससे रक्त बहुत अधिक पतला हो जाता है और सोडियम का स्तर खतरनाक रूप से गिर जाता है। इस स्थिति को हाइपोनेट्रेमिया कहते हैं। पानी कोशिकाओं में जा सकता है और उनमें सूजन पैदा कर सकता है; मस्तिष्क की कोशिकाएँ प्रभावित हों तो यह विशेष रूप से खतरनाक होता है। सामग्री में पानी के संतुलन के इस गंभीर विकार को जल विषाक्तता भी कहा गया है।
पानी की अत्यधिक मात्रा लेने के शुरुआती संभावित लक्षणों में मतली, उल्टी, सिरदर्द और मांसपेशियों की कमजोरी शामिल हैं। गंभीर मामलों में भ्रम, दौरे और बेहोशी हो सकती है, और यह स्थिति जानलेवा हो सकती है। उदाहरण के लिए, लंबे समय तक व्यायाम करते समय यदि कोई व्यक्ति तेज़ी से बहुत अधिक तरल पदार्थ पी ले, तो जोखिम बढ़ जाता है। सामग्री में गुर्दे, हृदय और यकृत की कुछ बीमारियों तथा कुछ दवाओं को भी खतरा बढ़ाने वाले कारकों के रूप में बताया गया है।
कुल तरल सेवन में कई तरह के पेय और खाद्य पदार्थ शामिल हो सकते हैं। बिना चीनी वाली फलों और हर्बल चाय का ज़िक्र विविधता के लिए एक विकल्प के तौर पर किया गया है; सीमित मात्रा में काली और हरी चाय के साथ-साथ कॉफ़ी भी इसमें गिनी जाती है, हालाँकि कैफ़ीन की मात्रा पर नज़र रखना ज़रूरी है। दूध और बिना अतिरिक्त चीनी वाले पौधों से बने पेय, सूप—खासकर सब्ज़ियों के सूप—और पानी से भरपूर खाद्य पदार्थ, जैसे खीरा, टमाटर, तरबूज़ और संतरे, भी तरल देते हैं। ये सामान्य दिशानिर्देश हैं: वास्तविक ज़रूरत उम्र, शरीर, गतिविधि और तापमान पर निर्भर करती है।
स्रोत: UNIAN




